Poems

It was not until she started to wander that she found herself.

Barren roads and slippery curves praised her.

Mountains and peaks , guarding her from life 

Wandering in those lush green forest she witnessed the lost soul

Away from the crowd of city ,the lullaby of streams served the peace.

Bugs bunny played hide and seek when she was lost making her own castle. 

The stretched lands of deserts made her believe the power of what she was “alone”

And when the reality woke her up she thanked those sleepless nights for being the escape. 

Looking back was never an option, as the kid in her is still alive.

She plays beauty and the beast all by herself .,completing the missing part. 

Cold breeze kept her moving greeting everyone on steps.

Messy bun and smelly shoes became her hologram. Why ?? 

Because,

It was not until she started to wander that she found herself 



My first poem

                Not much year's to life,

Yet depth of miles.

A transparent soul ,with nothing to hide.

A mind that wanders from time to time.

Silence and words are partners to bring the glory,

Smile played safe to hide the story.

Common face with a common name,

Yet dreams so strong to fly above fame. 

She was never a bird for cage,as

Her wings were bigger than a slave.

Yes she is a rebel with armor of love, because she believes in building her own universe.



Safar

धुंधला धुंधला है सब इस तरफ,

शायद धुआं हटने में वक़्त है II

कोई कहता है कुछ दिन , कोई कहता है कुछ साल .

मझे लगता है ऐसा ही अच्छा है, शायद II

ज़िन्दगी के शहर में , सपनों का बाज़ार .बहुत बड़ा है,

कोई अंदर जाके खरीद लेता है कोई बहार से सिर्फ तस्वीर लेता है II

धुंधला सा लगता है अभी सब कुछ, कोई धीर धीरे आगे बढ़ता है कोई बादलों से ऊपर उड़ जाता है II

कोई हाथ छुड़ा के, कोई साथ चल के II

शायद , उस पार सब कुछ हसीं है II

शायद , इस पार जो है उससे हसीं कुछ नहीं, और शायद आपसे हसीं कुछ नहीं II

भ्रम और सच किसको पता है ? उस पार जाकर कौन आया है ?

सबके सफर की अपनी कहानी है II किसी को राह में हमसफ़र मिले , किसी ने सफर को हमसफ़र बना लिए II

सब कुछ धुंधला सा है , और शायद इसी में सुकून है II



बड़े शहरों के सपने, बड़े रंगबिरंगे, बड़े अतरंगी सपने ॥ 

कभी पलते कभी बदलते सपने, बड़े शहरों के सपने ।।

ये वो रिश्वत है जो आपको बावला करदे ये वो दवा है जो हज़ारों को रिहा करदे । इनको बस ख्याल मत समझना हुज़ूर, ये वो चमक है जो सबको धुंधला करदे ।बड़े शहरों के सपने i

वो, जो हर दौलत से मेहंगे हैं, वो, जो हर ढलते सूरज के चेहरें हैं ।। 

बड़े शहरों के सपने ।।

इनको तुम तौफा समझना, इत्तेफाक नहीं ।।

बड़े शहरों के सपने हैं, इनमें गुरूर थोड़ा ज़्यादा होता है। ये बो राजनीति है, जिसके आगे खुद राजनीति भी हार गई, ये वो दिल लगी है जिसके आगे गरीब

भी लड़खड़ा गई i

बड़े शहरों के सपने, नदी किनारे, लाखों के बीच रंगबिरंगे और अतरंगी से सपने